श्री हरिराम व्यास जी ब्रजभक्ति परंपरा के प्रख्यात संत, रसिक कवि एवं श्रीराधा-कृष्ण के अनन्य उपासक थे। उन्हें अनेक भक्तजन श्री विशाखा सखी का अवतार मानकर श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हैं। उनकी वाणी में ब्रज-रस, माधुर्य-भक्ति और दिव्य प्रेम की सहज अनुभूति झलकती है, जिसने असंख्य साधकों को भक्ति मार्ग की ओर प्रेरित किया। उनके पद और काव्य आज भी ब्रज संस्कृति तथा राधा-कृष्ण प्रेमोपासना के अमूल्य धरोहर के रूप में आदरपूर्वक गाए और पढ़े जाते हैं।
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