श्री चैतन्य महाप्रभु

श्री चैतन्य महाप्रभु 15वीं–16वीं शताब्दी के महान वैष्णव संत, समाज-सुधारक एवं गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय के प्रख्यात आचार्य थे। उन्होंने श्रीकृष्ण-नाम संकीर्तन को कलियुग में ईश्वर-प्राप्ति का सर्वश्रेष्ठ साधन बताते हुए प्रेम, समानता और भक्ति का संदेश दूर-दूर तक फैलाया। उनके जीवन का प्रत्येक क्षण श्री राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और भगवन्नाम के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा। उनकी शिक्षाएँ आज भी विश्वभर में भक्तों को निष्काम भक्ति, विनम्रता और आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित करती हैं।